शनिवार 7 नवंबर 2026 - 16:32
वैश्विक बदलाव और जनआंदोलन पश्चिमी शक्तियों के पतन के संकेत हैं:  सय्यद सदरुद्दीन क़बांची

नजफ़ अशरफ़ के इमामे जुमा हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सदरुद्दीन क़बांची ने तथाकथित हैलोवीन समारोहों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें 'आयातित अज्ञानता' करार दिया है। उन्होंने इराकी सरकार से मांग की कि वह इस अनैतिक सांस्कृतिक आक्रमण के खिलाफ स्पष्ट और प्रभावी रुख अपनाए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सदरुद्दीन क़बांची ने नजफ़ अशरफ़ के हुसैनिया आज़म फातिमिया में जुमे की नमाज़ के खुतबों के दौरान इराक के आंतरिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार व्यक्त किए।

नजफ़ अशरफ़ के इमामे जुमा ने कहा कि हमारे समाज में तथाकथित हैलोवीन के नाम पर ऐसे समारोह आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका हमारी धार्मिक और राष्ट्रीय संस्कृति से कोई संबंध नहीं है। इन आयोजनों में शैतानी वेशभूषा, भय और आतंक तथा जीवन के सभी मूल्यों से दूरी को बढ़ावा दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि यह युवा पीढ़ी को उद्देश्यहीनता और खोखली विचारधारा की ओर धकेलने के लिए आयात की जा रही अज्ञानता है। हम सरकार से मांग करते हैं कि वह इस अनैतिक सांस्कृतिक आक्रमण के खिलाफ स्पष्ट और प्रभावी रुख अपनाए।

इराक के आंतरिक राजनीतिक मतभेदों पर चिंता

इराक की आंतरिक स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कुर्द राजनीतिक दलों, विशेष रूप से कुर्दिस्तान पैट्रियॉटिक यूनियन और कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच मतभेदों का उल्लेख किया।

उनके अनुसार, इन मतभेदों के प्रमुख कारणों में सरकारी पदों का बंटवारा, प्रशासनिक मामले और बगदाद के साथ संबंधों की कार्यप्रणाली शामिल हैं।

इमामे जुमा ने केंद्र सरकार से मांग की कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और बगदाद के साथ संबंधों से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

छात्रों और कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सय्यद सदरुद्दीन क़बांची ने विभिन्न वर्गों के विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र, सरकारी कर्मचारी और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे लोग अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हजारों छात्र आर्थिक बोझ कम करने, शिक्षण संस्थानों की स्थिति सुधारने और स्नातक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।

इसी तरह बड़ी संख्या में पुराने स्नातकों, उच्च शैक्षणिक योग्यता रखने वाले लोगों, संविदा कर्मचारियों और अंशकालिक शिक्षकों ने भी विरोध प्रदर्शन किए हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इराकी सरकार इन मांगों पर ध्यान देगी और गंभीरता से आवश्यक कदम उठाएगी, ताकि देश की अर्थव्यवस्था तथा युवा पीढ़ी के भविष्य को बेहतर बनाया जा सके।

बसरा में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल स्थिति

नजफ़ अशरफ़ के इमामे जुमा ने बसरा प्रांत में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले कई दिनों से हजारों लोग आवश्यक सुविधाओं की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं, लेकिन इस प्रांत में अस्पतालों की भारी कमी है और बड़ी संख्या में अस्थायी स्कूल अब भी संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि उत्तरी बसरा को बुनियादी ढांचे के विकास की सख्त जरूरत है। वहीं बसरा, नासिरिया और अमारा को जोड़ने वाला राजमार्ग मौत का रास्ता बन चुका है, जहां आए दिन लोगों की जान जा रही है।

उन्होंने कहा कि बसरा तेल का केंद्र है, लेकिन विशेष रूप से उत्तरी बसरा के लोग बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति से परेशान हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार और प्रांतीय प्रशासन से मांग की कि वे इन समस्याओं का समाधान करें और उन लोगों की परेशानियां दूर करें, जिन्होंने दाइश और अन्य दुश्मनों के खिलाफ लड़ाई में हजारों शहीदों की कुर्बानियां दी हैं।

इस अवसर पर उन्होंने पवित्र कुरआन की इस आयत का हवाला दिया:

«هَلْ جَزَاءُ الْإِحْسَانِ إِلَّا الْإِحْسَانُ»

अर्थात, नेकी का बदला नेकी के सिवा और क्या हो सकता है?

वैश्विक बदलाव और इस्लामी सभ्यता का भविष्य

अंतरराष्ट्रीय हालात का विश्लेषण करते हुए नजफ़ अशरफ़ के इमामे जुमा ने कहा कि इस्लाम का प्रभुत्व अपरिहार्य है और इस्लाम दुनिया के सामने एक वैकल्पिक सभ्यतागत व्यवस्था प्रस्तुत करता है। आज दुनिया में घटित हो रही घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक व्यवस्था बदल रही है। अब तक इस व्यवस्था पर इस्लाम-विरोधी बड़ी शक्तियों का वर्चस्व रहा है।

उन्होंने अमेरिका में हो रहे राजनीतिक बदलावों का उल्लेख करते हुए अब्दुस्सैयद की सीनेट चुनाव में जीत और उनकी हिजाब पहनने वाली पत्नी का जिक्र किया। इससे पहले न्यूयॉर्क के मेयर के रूप में ज़ोहरान ममदानी की जीत तथा फिलिस्तीनी मूल की मुस्लिम और हिजाब पहनने वाली महिला अबीर क़वास की न्यूयॉर्क राज्य के निर्वाचन क्षेत्र संख्या 12 से जीत को भी उन्होंने इसी बदलाव का हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि इन सफलताओं के माध्यम से इज़राइल के प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों को राजनीतिक चुनौती मिल रही है। इस संबंध में अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने युद्ध को अपनी नाकामी का प्रमुख कारण बताया और इज़राइल के साथ संबंधों की समीक्षा करने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि ये बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के हैं, जिनका अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी समर्थन किया है।

फ्रांस और यूरोपीय देशों में बढ़ते जनप्रदर्शन

हुज्जतुल इस्लाम सय्यद सदरुद्दीन क़बांची ने फ्रांस में महंगाई और इस्लामी गणराज्य ईरान के खिलाफ युद्ध में फ्रांस की भागीदारी के कारण हुए बड़े और तीव्र विरोध प्रदर्शनों का भी उल्लेख किया।

उनके अनुसार, यूरोप के कई देशों में जारी ये प्रदर्शन इस बात के संकेत हैं कि यूरोपीय संघ विघटन के करीब पहुंच रहा है और अमेरिका तथा यूरोपीय संघ के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि हम एक नए दौर की शुरुआत के मोड़ पर खड़े हैं, जो इंशाअल्लाह भविष्य में इस्लामी जागरूकता और इस्लामी पुनर्जागरण का संदेश लेकर आएगा।

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